विद्यालय के सेवानिवृत्त एवं वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर शिक्षक के रूप में दिया सम्मान

(दिलशाद खान)

(न्यूज़ रुड़कीं)। B.s.m. इंटर कॉलेज रुड़की में आज शिक्षक दिवस कार्यक्रम को भारत रत्न डॉo सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के रूप में मनाते हुए उनके विचारों का अनुसरण करने का प्रण लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री माननीय मनोहरलाल शर्मा एडवोकेट ने शिरकत की। उन्होंने विद्यालय के सेवानिवृत्त एवं वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट करके एक शिक्षक के रूप में सम्मान दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक को समाज और राष्ट्र निर्माता का दर्जा दिया गया है। समय के साथ-साथ हमारे देश में शिक्षा की प्रणालियाँ विकसित होकर बदलती गई पर आज भी शिक्षक को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। जीवन के विभिन्न मोड़ पर हमें अलग-अलग शिक्षकों की आवश्यकता होती है। सिर्फ सामान्य मानव ही नहीं हमारे संस्कृति में भगवान माने जाने वाले राम और कृष्ण के भी गुरू थे। इसीलिए शिक्षक दिवस की इस अवधारणा के पहले भी और आज भी गुरू पूर्णिमा मनाई जाती है। हमारे संस्कृति में शिक्षक के लिए गुरू शब्द का प्रयोग किया गया है। गुरू का विश्लेषण करने पर हमारे सामने जो अर्थ आता है वह है – ‘अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला’। इस प्रकार हमारी संस्कृति में गुरू के लिए बहुत व्यापक शब्द है। विद्यालय के विकास एवं उन्नयन के लिए सभी शिक्षक निस्वार्थ भाव से अपना संपूर्ण योगदान ऐसे ही देते रहें इसके लिए उन्होंने सभी शिक्षकों को बधाई दी। विद्यालय के प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि इस विद्यालय की सेवा निवृत अध्यापकों से हमने बहुत कुछ सिखा है और हमारे सभी वर्तमान में कार्यरत अध्यापकों को भी उनका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने शिक्षक दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भारतरत्न डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। वह एक दार्शनिक और विद्वान शिक्षक भी थे। 1962 में जब उनके मित्रों और विद्यार्थियों ने उनके जन्मदिन को मनाने की इच्छा जताई कि वह उनका जन्मदिन मनाना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि यह ज्यादा अच्छा होगा कि अगर उनके जन्मदिन यानी 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मानाया जाए। और तब से यह परंपरा चली आ रही है कि हम 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। एक शिक्षक किसी भी बच्चे की जिंदगी में बहुत महत्व रखता है उन्हें अच्छी शिक्षा व अच्छे संस्कार देने के लिए भी। वैसे तो कहा जाता है कि संस्कार परिवार वाले और खास कर माता पिता अपने बच्चे को देते हैं परंतु अगर देखा जाए तो एक बच्चे को सिर्फ उनके माता पिता ही नहीं बल्कि उनके शिक्षक भी संस्कार देते हैं। शिक्षक की भूमिका हमारे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण रोड अदा करती है। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता श्री ममतेश शर्मा, श्री रजनीश शर्मा एडवोकेट, श्री आर डी एस कपिल, श्री वासुदेव पंत, डॉo ममता जोशी, सेवानिवृत अविनाश कुमार शर्मा, राजेंद्र शर्मा, आजाद सिंह, जयकुमार, अजय कौशिक, डॉo अनिल कुमार शर्मा, डॉo अभय ढौंडियाल, अखिलेश मोहन, अमित कपिल, प्रमोद शर्मा, डी एन पांडेय आदि मौजूद रहे।

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