लंढौरा में अंजुमन दयार के अदब के ज़ेरे एहतमाम एक ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित किया गया

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(दिलशाद खान)

(न्यूज़ रुड़कीं) 14 दिसम्बर लंढौरा में अंजुमन दयार के अदब के ज़ेरे एहतमाम एक ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित किया गया जिसमें नवजवान उभरते हुए शायर कलीम वफ़ा का जशन मनाया गया जिसमे उन्हें मुख्यातिथि उमेश कुमार ने एक अवार्ड और एक शॉल पेश कर सम्मानित किया और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय हंसिए व्यंग के शायर सिकन्दर हयात गड़बड़ को भी वक़ार ए तन्ज़ो मिज़ाह के अवार्ड से नवाज़ा गया।

इससे पूर्व मुख्यातिथि उमेश कुमार ने उद्घाटन किया और उन्होंने कहा कि इस तरह की अदबी महफ़िल भाई चारे को बढ़ावा देती है और और उन्होंने मुशायरे कन्वीनर रहमत अली को भी ऐसे हर प्रोग्राम में सहयोग करने का आश्वासन दिया मुशायरे की शमा रोशन सी टी हॉस्पिटल के एम डी तंसर अली ने की और रास्ट्रीय एकता की शमा नवजवान समाज सेवी अज़ीज़ बादशाह के द्वारा की गई इस मुशायरे खास बात ये रही कि शहीद कर्नल रावत और शहीद हुए किसानों के लिये 2 मिंट मौन रख कर श्रधांजलि दे कर रास्ट्रीय एकता की मिसाल पेश की गई इन अवसर पर शायरों ने एक से बढ़ कर एक कलाम पेश कर मुशायरे की बेहद क़ामयाब बना दिया

ग़ज़ल के बादशाह अपने ख़ास तरन्नुम के मालिक जिन्होंने पुर दुनिया मे अपनी शोहरत का डंका बजा रखा है ख़ुर्शीद हैदर ने एक बाद एक कई ग़ज़ले पेश की उन्हीने कहा कि
ग़ैर परों पर उड़ सकते हैं हद के हद दीवारों तक
अम्बर पर तो वही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे
एक और अनरास्ट्रीय शायर जिन्होंने 3 दर्जन से ज़्यादा मुल्कों में अपनी शायरी के ज़रिए हिंदुस्तान का नाम पूरी दुनिया मे रोशन किया हँसय सम्राट सिकन्दर हयात गड़बड़ ने अपने घर का किस्सा यूं बयान किया
मेरे जन्नत जैसे घर को भी जहन्नम कर दिया
ईद के दिन उसने रो रो कर मुहर्रम कर दिया
चार बीवी की भला सुन्नत अदा कैसे करूं
एक ही बीवी ने मेरे नाक में दम कर दिया
इनके बाद एक खूबसूरत शायर अंजुम देहलवी ने सिकन्दर हयात गड़बड़ की नज़र जब ये शेर किया तो मुशायरे ज़बरदस्त तालियों की गड़गड़ाहट होई
चाँद घूँघट से जिस दिन निकल जायेगा
देखए दिल तुम्हारा मचल जाएगा
एक और शायर साहिल माधोपुरी ने भी मुशायरे को ज़िन्दगी बख्से हुए कहा कि
दिल से नफ़रत के चरागों को बुझादो यारों
फिर से इस मुल्क को गुलज़ार बनादो यारों
साहिबे जशन कलीम वफ़ा ने भी मुशायरे में चार चांद लगते हुए पढ़ा कि
आंखों में अश्क हाथ मे पत्थर नहीं मिला
दुश्मन भी हमको क़द के बराबर नहीं मिला
एक और आवाज़ के जादूगर अमजद आतिश ने बेहतरीन शायरी से लोगों का दिल जीत लिया
वहशतें रश्क़ करने लगती हैं
एक चेहरा बनाके काग़ज़ पर
अफ़रोज़ टांडवी ने भी अपनी ग़ज़लों व गीतों से मुशायरे को बुलंदी तक पहुंचाया
उधर से उसने जो बंदूक तान रखी है
इधर से हमने भी मरने की ठान रखी है
इनके अलावा महमूद असर ,ज़करिया गौहर, फैसल स्योहरवी, उमैर समर
वगैरा ने भी अपनी बेहतरीन शायरी से लोगों का दिल जीत लिया आखीर में मुशायरे के कन्वीनर रहमत अली ने सबका शुक्रिया अदा किया

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